दांतों में इन्फेक्शन क्यों होता है?

क्या आपके दांतों में दर्द रहता है, या ठंडा-गर्म लगने पर ही परेशानी शुरू हो जाती है? बहुत से लोग इंटरनेट पर रोज यही सवाल खोजते हैं। कई बार लोग दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। बाद में वही छोटी समस्या बड़ा इन्फेक्शन बन जाती है। दांतों का इन्फेक्शन केवल दर्द तक सीमित नहीं रहता। यह खाने, बोलने और सोने तक को प्रभावित कर सकता है। सही जानकारी होने से इस परेशानी से बचना आसान हो जाता है।

 

दांतों में इन्फेक्शन 5 प्रमुख कारण

दांतों में इन्फेक्शन तब होता है जब बैक्टीरिया दांत या मसूड़ों के अंदर पहुंच जाते हैं। मुंह में हमेशा कुछ बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं। जब सफाई ठीक से नहीं होती, तब ये बैक्टीरिया नुकसान पहुंचाने लगते हैं। धीरे धीरे दांतों की ऊपरी परत खराब होने लगती है। इसके बाद अंदर सड़न शुरू हो जाती है। अगर समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो संक्रमण नसों तक पहुंच सकता है।

 

1. कैविटी और सड़न का असर

बहुत से लोगों में इन्फेक्शन की शुरुआत कैविटी से होती है। जब कोई व्यक्ति बहुत मीठा खाता है और ठीक से ब्रश नहीं करता, तब दांतों पर प्लाक जमने लगता है। यही प्लाक धीरे धीरे दांतों को कमजोर करता है। शुरुआत में केवल हल्का-सा काला निशान दिखता है। बाद में दांत के अंदर गड्ढा बनने लगता है। इसी रास्ते से बैक्टीरिया अंदर पहुंचते हैं और संक्रमण बढ़ने लगता है। इसलिए कैविटी को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

 

2. मसूड़ों की खराब सफाई

कई लोग केवल सुबह जल्दी ब्रश करते हैं। कुछ लोग रात में खाना खाने के बाद बिना सफाई किए सो जाते हैं। इससे मसूड़ों में गंदगी जमा हो जाती है। धीरे धीरे मसूड़े सूजने लगते हैं। कई बार ब्रश करते समय खून भी आता है। यह संकेत बताता है कि मुंह के अंदर संक्रमण बढ़ रहा है। अगर इस समय सही इलाज न मिले तो दांत कमजोर होने लगते हैं। बाद में दांत हिलने तक की समस्या हो सकती है।

 

3. टूटा हुआ दांत भी कारण बनता है

कई बार किसी चोट की वजह से दांत टूट जाता है। कुछ लोगों के दांत बहुत सख्त चीज चबाने से भी टूट जाते हैं। टूटा हुआ हिस्सा बैक्टीरिया के लिए रास्ता बना देता है। इसके बाद अंदर संक्रमण तेजी से फैल सकता है। कई बार दर्द तुरंत नहीं होता। इसी वजह से लोग डॉक्टर के पास नहीं जाते। बाद में अचानक तेज दर्द शुरू हो जाता है। इसलिए दांत टूटने पर जल्दी से जल्दी जांच कराना जरूरी होता है।

 

4. गलत खानपान का प्रभाव

आजकल बच्चे और बड़े दोनों ही पैकेट वाले खाने ज्यादा खाते हैं। मीठे पेय, चॉकलेट और चिपचिपा खाना दांतों में फंस जाते हैं। अगर सफाई सही तरीके से न हो तो बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। इससे दांतों की जड़ें प्रभावित होने लगती हैं। बहुत ज्यादा ठंडा और बहुत ज्यादा मीठा खाना भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए संतुलित भोजन दांतों की सुरक्षा के लिए जरूरी होता है। दांतों की सफाई जितनी अच्छी होगी उतना संक्रमण का खतरा कम रहेगा।

 

5. कमजोर आदतें भी जिम्मेदार

कुछ लोग तंबाकू या धूम्रपान का सेवन करते हैं। इससे मुंह का वातावरण खराब होने लगता है। मसूड़ों में खून का प्रवाह कम हो जाता है। इसी कारण संक्रमण जल्दी बढ़ता है। कई बार लोगों को मुंह से बदबू भी आने लगती है। कुछ लोग पानी कम पीते हैं। इससे मुंह सूखा रहता है और बैक्टीरिया ज्यादा बढ़ते हैं। छोटी छोटी आदतें लंबे समय में बड़ी परेशानी पैदा कर सकती हैं।

 

इन्फेक्शन के सामान्य संकेत

दांतों में लगातार दर्द होना संक्रमण का बड़ा संकेत माना जाता है। कुछ लोगों को सूजन महसूस होती है। कई बार चेहरे पर भी हल्की सूजन दिखने लगती है। मुंह से बदबू आना भी एक संकेत हो सकता है। कुछ लोगों को खाना चबाने में परेशानी होती है। अगर गर्म या ठंडा लगते ही तेज झनझनाहट हो तो जांच जरूरी होती है। कई बार बुखार भी आ सकता है। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

बहुत से लोग यह भी पूछते हैं कि क्या केवल दर्द होने पर ही इन्फेक्शन होता है। इसका जवाब नहीं है। कई बार शुरुआत में कोई दर्द नहीं होता। केवल हल्की संवेदनशीलता महसूस होती है। कुछ लोगों को दांत भारी लगते हैं। कई बार मसूड़ों के पास सफेद परत दिखती है। यह शुरुआती संकेत हो सकते हैं। बच्चे अक्सर दर्द छिपा लेते हैं क्योंकि उन्हें डर लगता है। इसलिए माता पिता को समय समय पर बच्चों के दांत देखना चाहिए। अगर बच्चा एक तरफ से खाना चबाता है तो यह भी परेशानी का संकेत हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ दांतों की देखभाल और जरूरी हो जाती है। कमजोर मसूड़े संक्रमण को जल्दी बढ़ा सकते हैं। सही ब्रश चुनना भी जरूरी होता है। बहुत सख्त ब्रश मसूड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए नरम ब्रश का उपयोग अधिक सुरक्षित माना जाता है। जीभ साफ रखने से मुंह हमेशा स्वस्थ रहता है।

 

समय पर इलाज क्यों जरूरी है?

अगर संक्रमण लंबे समय तक बना रहे तो परेशानी बढ़ सकती है। कई बार पस बनने लगती है। इससे दर्द बहुत तेज हो जाता है। कुछ मामलों में संक्रमण आसपास के हिस्सों तक भी पहुंच सकता है। समय पर इलाज मिलने से दांत को बचाना आसान हो जाता है। डॉक्टर जांच करके सही कारण समझते हैं। जरूरत पड़ने पर सफाई, दवा या दूसरी प्रक्रिया की सलाह दी जाती है। इसलिए देरी करना सही नहीं माना जाता।

 

बचाव कैसे किया जा सकता है?

दिन में दो बार सही तरीके से ब्रश करना बहुत जरूरी है। खाना खाने के बाद कुल्ला करने की आदत भी मदद करती है। ज्यादा मीठा खाने से बचना चाहिए। हर कुछ महीनों में दांतों की जांच करवाना अच्छा माना जाता है। साफ सफाई रखने से संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है। अगर दांत में हल्का दर्द भी महसूस हो तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर ध्यान देने से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है। स्वस्थ दांत रखने के लिए सही जानकारी और समय पर देखभाल जरूरी होती है, और जरूरत पड़ने पर The Dental Cure जैसे भरोसेमंद डेंटल क्लिनिक से सलाह लेना फायदेमंद साबित हो सकता है।